स्वास्थ्य शिक्षा लाइब्रेरी
न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य, निदान और निवारक देखभाल के बारे में विशेषज्ञ ज्ञान के साथ रोगियों को सशक्त बनाना।

डॉ. रंजन कुमार || लाइव बियॉन्ड एपिलेप्सी || इंडियन एक्सप्रेस
मिर्गी और दौरे क्या हैं। मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे मिर्गी है? || डॉ. रंजन कुमार
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नमस्कार मैं डॉक्टर रंजन कुमार हूं। मैं कंसलटेंट न्यूरोलॉजिस्ट हूं लखनऊ में। आज हम बात करेंगे सीजर और एपिलेप्सी के बारे में और हम एपिलेप्सी या सीजर को कैसे पहचाने? फर्स्ट सीजर क्या होता है? सीजर एक सिम्टम है जो कि हमारे ब्रेन में एबनॉर्मल और एक्सेसिव इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की वजह से आते हैं। सिम्टम किसी भी तरीके से आ सकते हैं। जैसे कि लिप स्मैकिंग, शरीर के किसी एक तरफ झटके आना या हाथ पैर में ऐंठन होना, अकड़न होना या पूरे शरीर में झटके होना। उसके साथ-साथ आंखें ऊपर हो जाना, एक्सेसिव आंखों का ब्लिंक करना और कभी-कभी मरीज को लैट्रिन और पेशाब भी छूट जाती है। सीजर मरीज को बहुत से कारणों से हो सकते हैं। इसमें से बहुत से कारण करेक्टबल होते हैं जिसको कि हम ठीक कर सकते हैं। कुछ ऐसे कारण भी होते हैं जिसको हम लोग ठीक नहीं कर सकते। ठीक करने वाले कारणों में से जो मोस्ट कॉमन कारण होते हैं: कभी-कभी मरीज को दिमागी बुखार के साथ झटके आते हैं। बच्चों को हाई ग्रेड फीवर के साथ झटके आ सकते हैं। और कभी स्ट्रोक के साथ या दिमाग में क्लॉटिंग या ब्लीडिंग के साथ भी मरीज को झटके आने का डर रहता है। इसके साथ में सोडियम कम हो जाना, शुगर कम हो जाना ये सब कॉमन कारण है जिससे मरीज को झटके आ जाते हैं। झटके या सीजर आने से हम किसी भी मरीज को एपिलेप्सी का पेशेंट नहीं बोलते हैं। सेकंड चीज होती है एपिलेप्सी। एपिलेप्सी एक ऐसी कंडीशन है जिसमें मरीज को बार-बार झटके आने की टेंडेंसी होती है। इसमें क्या होता है? अगर किसी भी व्यक्ति को दो या दो से अधिक बार 24 घंटे के अंतराल के बाद झटके आते हैं और उसका कोई डेफिनेट कारण अगर हमें नहीं मिलता है तब हम वैसे व्यक्ति को कहते हैं कि एपिलेप्सी का पेशेंट है। तो यह बहुत इम्पोर्टेन्ट है कि हम लोग उसको डिफरेंशिएट करें सीजर क्या है और एपिलेप्सी क्या है। अगर हमें पता लग गया कि किसी भी मरीज को झटके आ रहे हैं या उसको एपिलेप्सी है तो व्यक्ति कैसे पहचानेंगे कि उनको ये प्रॉब्लम है। तो सबसे इंपॉर्टेंट होती है सीजर या एपिलेप्सी में मरीज के सिम्टम्स। सिम्टम बहुत सारे तरीकों से आते हैं, जैसे कोई मरीज एक तरफ को लगातार ब्लैंक स्टेयर कर रहे हैं या उसको लिप स्मैकिंग कर रहे हैं। एब्डोमिनल फुलनेस हो रही है या आई ब्लिंकिंग हो रही है। एबनॉर्मल जर्की मूवमेंट हो रहा है बॉडी में। ये सब भी झटके के टाइप्स होते हैं। बड़े झटकों में जिसको कि हम जनरलाइज टोनिक क्लोनिक सीजर कहते हैं, चारों हाथ पैर में मरीज को अकड़न होती है और मरीज बेहोश भी हो जाते हैं। पहचानने का सबसे अच्छा तरीका है कि जो भी व्यक्ति हैं, पेशेंट है वह अपने सिम्टम्स को डॉक्टर के पास बिलकुल क्लियरली या जो उनके रिलेटिव है जिनके सामने ये घटना घटी है वो डॉक्टर को बिल्कुल उसी की भाषा में क्लियर कट बताएंगे कि मरीज को किस प्रकार से सिम्टम आ रहा था। इससे डॉक्टर को पहचानने में काफी आसानी होती है कि मरीज को किस टाइप की एपिलेप्सी या झटके हैं जिसका कि प्रॉपर ट्रीटमेंट आगे किया जा सके। सेकंड चीज हम कुछ स्कैन्स जैसे कि एमआरआई और सिटी स्कैन की मदद भी ले सकते हैं और एक टेस्ट होता है ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राम)। वो बहुत ही हेल्पफुल होता है हमें एपिलेप्सी की डायग्नोसिस बनाने में और दवाइयों का रिस्पांस देखने में कि मरीज की झटकी कंट्रोल में है या नहीं।

डॉ. रंजन कुमार द्वारा बेरा टेस्ट (BERA Test) की व्याख्या | सुनने और नसों की समस्याओं का शीघ्र निदान | चंदन अस्पताल
👂 सुनने में परेशानी या बोलने में देरी? यह BERA टेस्ट (ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडियोमेट्री) का समय हो सकता है — एक दर्द रहित और अत्यधिक सटीक परीक्षण जो सुनने की क्षमता और ब्रेनस्टेम तंत्रिका प्रतिक्रियाओं का आकलन करने में मदद करता है। इस वीडियो में, चंदन अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रंजन कुमार समझाते हैं: ✅ BERA टेस्ट क्या है ✅ यह सुनने या नसों की समस्याओं के निदान में कैसे मदद करता है ✅ बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए शीघ्र परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है चंदन अस्पताल में, हम स्वस्थ श्रवण और बेहतर न्यूरोलॉजिकल परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उन्नत न्यूरो-डायग्नोस्टिक सुविधाएं, विशेषज्ञ देखभाल और प्रारंभिक हस्तक्षेप प्रदान करते हैं। 📍 चंदन अस्पताल, लखनऊ और हल्द्वानी आएं 📞 कॉल करें: 79051 79848 🌐 www.chandanhospital.in
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नमस्कार। आज हम बात करेंगे एक टेस्ट बैरा के बारे में। बैरा का मतलब होता है ब्रेन स्टेम इवोक रिस्पांस ऑडियोमेट्री। यह एक हियरिंग का टेस्ट है। [संगीत] इस टेस्ट में हमें देखना होता है कि मरीज को कान से लेकर ब्रेन के हिस्से ब्रेन स्टेम में जो ऑडिटरी रिस्प्ससेस हो रहे होते हैं नॉर्मल जा रहे हैं या नहीं जा [संगीत] रहे हैं। एक बहुत ही सिंपल टेस्ट है। इसमें मरीज को हम ईयरफोन लगा के ऑडियो रिस्पों्ससेस देते हैं और कंप्यूटर पे उसको हम लोग रिकॉर्ड करते हैं कि वो उसके रिस्पों्ससेस ब्रेन तक पहुंच रहे हैं कि नहीं पहुंच [संगीत] रहे हैं। इसका उपयोग होता है न्यूबर्न जो बच्चे होते हैं कुछ ऐसे व्यक्ति और ओल्ड एज जो कि नॉर्मल हियरिंग टेस्ट में कोऑपरेट नहीं कर सकते हैं उनमें [संगीत] हियरिंग की कोई प्रॉब्लम है समस्या है कि नहीं है इसका हम लोग पता लगाते हैं।

ईईजी टेस्ट मस्तिष्क की गतिविधि को कैसे मापता है | विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा व्याख्या | चंदन अस्पताल
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके मस्तिष्क की गतिविधि को कैसे मापा जाता है? 🧠 लखनऊ के चंदन अस्पताल में हमारे विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राम) टेस्ट के बारे में आपको सब कुछ समझाते हैं - आपके मस्तिष्क के विद्युत संकेतों का अध्ययन करने का एक सुरक्षित, दर्द रहित और प्रभावी तरीका। ✅ आप क्या सीखेंगे: ईईजी परीक्षण कैसे काम करता है यह किन स्थितियों का पता लगाने में मदद करता है (जैसे दौरे, मिर्गी और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकार) मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए शीघ्र निदान क्यों महत्वपूर्ण है ✨ सूचित रहें। स्वस्थ रहें। 📍 विशेषज्ञ न्यूरोलॉजी देखभाल और उन्नत मस्तिष्क परीक्षण सुविधाओं के लिए चंदन अस्पताल, लखनऊ आएं।
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आज हम बात करेंगे एक न्यूरोलॉजिकल टेस्ट जिसको कि ईजी कहते हैं। ईजी का मतलब होता है इलेक्ट्रोइंगफोग्राम। इस टेस्ट में हम क्या करते हैं कि जो भी मरीज की ब्रेन की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी होती है उसको इलेक्ट्रोड्स की मदद से रिकॉर्ड करते हैं। इसमें मरीज को हम कोई भी पेनफुल टेस्ट नहीं है। इसमें मरीज को आराम से लैब में लेटने के लिए कहा जाता है। उसके सिर पे इलेक्ट्रोड्स लगाए जाते हैं। और जो भी ब्रेन के अंदर इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीज होती हैं। आदि नॉर्मल हो या एब्नॉर्मल उसको हम लोग कंप्यूटर पे रिकॉर्ड कर लेते हैं। मेनली ये इस टेस्ट का यूज़ जो है एपिलेप्सी के मरीजों में किया जाता है। एपिलेप्सी का डायग्नोसिस के लिए, उसके ट्रीटमेंट के लिए और मरीज इलाज का रिस्पांस आ रहा है कि नहीं आ रहा है। यह सब हम लोगों को देखना होता है। और एपिलेप्सी से मिलती जुलती जो बीमारियां होती हैं जैसे कि मरीज होश में नहीं आ रहा है। मरीज को वास्तविक झटके आ रहे हैं कि नहीं इसके लिए भी हम लोग देखने के लिए इस टेस्ट को करवाते हैं। [संगीत]

चक्कर आ रहा है? पेश है चंदन हॉस्पिटल की कॉम्प्रिहेंसिव वर्टिगो लैब | एडवांस्ड न्यूरो केयर
चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना महसूस कर रहे हैं? चंदन हॉस्पिटल लाया है नई कॉम्प्रिहेंसिव वर्टिगो लैब, जिसे वर्टिगो, चक्कर और संतुलन विकारों के मूल कारण का निदान और उपचार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हमारी वर्टिगो लैब सुसज्जित है: ✔ उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक ✔ अत्यधिक अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट ✔ संपूर्ण मूल्यांकन और व्यक्तिगत उपचार ✔ संतुलन और चक्कर का मूल्यांकन ✔ सटीक विश्लेषण के लिए आधुनिक उपकरण चाहे आपके लक्षण कान की समस्याओं, तंत्रिका असंतुलन या न्यूरोलॉजिकल कारणों से हों - हम आपको सटीक उत्तर और सही उपचार खोजने में मदद करते हैं। 📍 चंदन हॉस्पिटल, लखनऊ पधारें 📞 0522-666-6666 🌐 www.chandanhospital.in ✨ चंदन हॉस्पिटल - स्वास्थ्य सेवा उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध
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चंदन हॉस्पिटल लखनऊ में हमारे पास एक कॉम्प्रिहेंसिव वर्टिगो लैब की शुरुआत की गई है। वर्टिगो लैब में वर्टाइगो से रिलेटेड जितने भी टेस्ट होते हैं जैसे वीएनजी (VNG), वीडियोस्टोग्राफी और उससे अदर रिलेटेड टेस्ट हम लोग करते हैं। इसकी मदद से मरीज की एग्जैक्ट डायग्नोसिस और क्लियर डायग्नोसिस बन पाती है कि मरीज को आखिरकार चक्कर क्यों आ रहा है। वो कोई नॉर्मल कारण है जैसे कान से रिलेटेड या कोई सीरियस कारण है जो कि ब्रेन से रिलेटेड और वो टेस्ट हम लोग करके मरीज की फाइनल डायग्नोसिस करके उसके हिसाब से प्रॉपर ट्रीटमेंट भी मरीज का हम लोग करते हैं। कुछ मेन्यूबर्स भी होते हैं जिसकी मदद से मरीज को कंप्लीट आराम आ जाता है वर्टिगो में। वह भी हमारे लैब में सुविधा है।

हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन? जानिए आपको NCV टेस्ट की आवश्यकता क्यों है | डॉ. रंजन कुमार
क्या आपके हाथों या पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो रही है? ये तंत्रिका क्षति के संकेत हो सकते हैं - और शीघ्र निदान महत्वपूर्ण है! इस वीडियो में, डॉ. रंजन कुमार (वाइस-चेयरपर्सन, चंदन इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज) एनसीवी टेस्ट (नर्व कंडक्शन वेलोसिटी टेस्ट) के बारे में बता रहे हैं - यह एक सरल, गैर-आक्रामक परीक्षण है जो नसों की समस्याओं को बिगड़ने से पहले पहचानने में मदद करता है। 👉 जानें कि एनसीवी टेस्ट किन स्थितियों की पहचान करने में मदद करता है: पेरिफेरल न्यूरोपैथी डायबिटीक नर्व डैमेज (मधुमेह तंत्रिका क्षति) कार्पल टनल सिंड्रोम और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकार 🧠 विशेषज्ञ न्यूरो परीक्षण और व्यापक नैदानिक देखभाल के लिए चंदन अस्पताल आएं। 📍 स्थान: लखनऊ
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नमस्कार। आज हम बात करेंगे एक न्यूरोलॉजिकल टेस्ट जिसको कि हम लोग एनसीएस या एनसीवी कहते हैं। मतलब नर्व कंडक्शन वेलोसिटी टेस्ट या नर्व कंडक्शन स्टडी। इस टेस्ट में हम इलेक्ट्रोड्स की मदद से मरीज की नसों में जो भी हरकत हो रही होती है उसकी जानकारी लेते हैं कि मतलब मरीज की नसों में जो इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी का प्रवाह नॉर्मल तरीके से हो रहा है या नहीं [संगीत] हो रहा है। ये टेस्ट बिल्कुल भी पेनफुल नहीं होता है। हल्का सा करंट देके मरीज की नसों की जांच की जाती है। किन बीमारियों में इसका हम लोग उपयोग कर सकते हैं? [संगीत] पेरिफेरल न्यूरोपैथी, कार्पल टनल सिंड्रोम, एएलएस नामक बीमारियां होती हैं। जिनमें हम इस टेस्ट का यूज करते हैं। [संगीत]